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कठिन समय में भी बनाए रखें धैर्य और नकारात्मक विचारों से रहें दूर

Keep patience and away from negative thoughts even in difficult times
  • नई दिल्ली/राजीव कुमार। इस बात से इनकार नहीं किया जा सकता है कि समय और परिस्थितियां हमेशा एक जैसी नहीं होती है। हर व्यक्ति के जीवन में कभी अच्छा समय आता है, तो कभी बुरे दौर से उसे गुजरना पड़ता है, लेकिन ऐसा माना जाता है कि व्यक्ति की पहचान उसके बुरे दौर में ही होती है। ऐसा कहने के पीछे सबसे बड़ा कारण यही है कि जीवन के अच्छे दौर में तो सामान्य से सामान्य व्यक्ति भी सही फैसला करने में सक्षम होता है लेकिन जब स्थिति प्रतिकूल हो, तो उस समय व्यक्ति की सही प्रतिभा का आकलन किया जाता है।

 

प्रतिकूल परिस्थितियों में सही निर्णय लेने वाला व्यक्ति ही सफलता की ओर अग्रसर होता है और जो व्यक्ति ऐसे समय में अपने को नहीं संभाल पाता उसे विफलता हाथ लगती है। आखिरकार प्रतिकूल समय में सही निर्णय लेने के लिए सबसे महत्वपूर्ण गुण क्या हो सकता है। कठिन परिस्थितियों के समय व्यक्ति को किसकी सबसे अधिक आवश्यकता होती है।

अगर गंभीरता से विचार करें तो प्रतिकूल परिस्थितियों में व्यक्ति के अंदर सबसे पहले घबराहट उत्पन्न होता है और उस घबराहट में उसे अजीबो गरीब ख्याल आते हैं, उसकी उम्मीदें कमजोर पड़ती जाती है, उसका धैर्य जवाब देने लगता है और ऐसी स्थिति में वह जो भी निर्णय लेता है, उसमें से अधिकांश गलत साबित होते हैं। इसलिए सबसे महत्वपूर्ण है प्रतिकूल समय में धैर्य को बनाए रखना। धैर्य से हीं कठिन से कठिन चुनौतियों का सामना किया जा सकता है। जिस व्यक्ति के पास धैर्य नहीं, वह छोटी से छोटी समस्याओं का सामना भी सही तरीके से नहीं कर पाता है।

आप इसके लिए अपने आसपास घटी अनेकों छोटी-छोटी घटनाओं का उदाहरण ले सकते हैं। पूरी दुनियां में होने वाली सड़क दुर्घटनाओं में अधिकांश दुर्घटनाएं धैर्य के अभाव के कारण होती है। सड़क पार करने के समय धैर्य के अभाव में लोग बिना दोनों तरफ देखे हुए जल्दबाजी में सड़क पार करने का फैसला ले लेते हैं और उनमें से कई लोग सड़क पार भी कर जाते हैं लेकिन कभी-कभी इसी दौरान कोई गाड़ी से टक्कर हो जाती है और फिर जान तक गंवानी पड़ती है। इसमें संयोग आपके साथ हो भी सकता है और आपके विपरीत भी लेकिन अगर आप धैर्य के साथ सही समय का इंतजार करते हैं और पूरी तरह से आश्वस्त होने के बाद सड़क पार करने का निर्णय लेते हैं, तो दुर्घटना की संभावना न के बराबर होती है।

कुछ इसी तरह जब आप स्कूल, कॉलेज या फिर किसी भी प्रतियोगिता परीक्षा की तैयारी करते हैं और परीक्षा का समय नजदीक होता है, तो आपके अंदर एक घबराहट उत्पन्न हो जाती है। जैसे-जैसे परीक्षा का समय नजदीक होता है, यह घबराहट तेज होती जाती है। जिन लोगों के पास धैर्य नहीं होता, वे ऐसे समय में पूरी सिलेबस को फिर से पढऩे और जल्दी-जल्दी पढऩे की कोशिश करते हैं। ऐसे में उनके हाथ कुछ नहीं लगता है। लेकिन, जिन लोगों के पास धैर्य होता है, वे शांति के साथ इसके ऊपर विचार करते हैं और फिर उन्हीं सामग्री को गंभीरता से पढऩे की कोशिश करते हैं, जिसके ऊपर उन्हें संशय होता है। ऐसा करके परीक्षा के आसपास के समय का भी वे सदुपयोग कर लेते हैं और यह धैर्य उन्हें सफल बनाने में सहयोगी बन जाता है। 

उदाहरण के तौर पर अगर कोई भी व्यक्ति आपको किसी कार्य को करने के लिए उकसाता है और आप उस उकसावे में आकर उसके मुताबिक निर्णय ले लेते हैं, तो यह आपकी कमजोरी को प्रदॢशत करता है और साथ हीं आपके लिए कठिनाइयां पैदा करता है। ऐसे में धैर्यशील व्यक्ति किसी के उकसावे को समझने की कोशिश करता है, थोड़ा ठहरता है और उसके बाद प्रतिक्रिया करता है।

ऐसी प्रतिक्रियाओं के सही होने की संभावना अधिकतम होती है। उदाहरण के तौर पर कई महापुरुषों के जीवन से संबंधित घटनाओं को देख सकते हैं। जितने भी वैज्ञानिक और आविष्कारक हुए हैं, उन्होंने सालों तक अपने अनुसंधान की सफलता का इंतजार किया है। उन्होंने कई असफल प्रयोगों का धैर्य के साथ आजमाया और हर असफलता के बाद फिर से उसे आगे बढ़ाया लेकिन उन्होंने अपना धैर्य नहीं खोया।

 

अगर धैर्य खो देते तो वे कभी आविष्कार नहीं कर पाते। हमें महात्मा गांधी के जीवन की कई घटनाओं से इसका प्रत्यक्ष उदाहरण मिल सकता है। जब पहली बार उन्हें दक्षिण अफ्रीका में रंग भेद की नीति के कारण ट्रेन से उतारा गया था, तो उन्होंने तुरंत ही उसकी प्रतिक्रिया नहीं की। उन्होंने उस अधिकारी के साथ उलझना सही नहीं समझा बल्कि उस पूरी स्थिति को समझा और पाया कि इसके पीछे का कारण रंग भेद की नीति है और जब तक इस नीति के ऊपर प्रहार नहीं किया जाता है, ऐसी घटनाओं को रोका नहीं जा सकता है।

उन्होंने इसके लिए योजना बनाई और फिर संघर्ष शुरू किया। हालांकि, उन्हें लम्बा संघर्ष करना पड़ा लेकिन उन्होंने धैर्य नहीं खोया और उसी धैर्य ने उन्हें सफलता दिलाई। कुछ इसी तरह के धैर्य का परिचय उन्होंने भारतीय स्वतंत्रता आंदोलन के समय भी दिया और कई आंदलनों की तथाकथित विफलताओं के बावजूद उन्होंने संयम नहीं खोया तथा संघर्ष करते रहे, जिसकी परिणति हमारे सामने है। 

धैर्य के साथ लिए गए निर्णय में कितनी शक्ति होती है, उसका एक उदाहरण विवेकानंद के साथ घटी एक घटना है। एक बार विवेकानंद के एक ईसाई दोस्त ने उनकी क्षमता को परखने की योजना बनाई। वे शायद उनकी बुद्धि की परीक्षा लेना चाहते थे। उन्होंने विवेकानंद को खाने पर आमंत्रित किया। जब वे उनके घर गए तो स्वामी जी को उस ईसाई दोस्त ने एक कमरे में बैठाया। उस कमरे में एक मेज पर कई धार्मिक पुस्तकें रखी हुई थी। उन पुस्तकों को एक दूसरे के ऊपर रखा गया था। विश्व के कई धर्मों की पुस्तकों में सबसे नीचे गीता और सबसे ऊपर बाइबिल रखा गया था।

उस व्यक्ति को इस बात की उम्मीद थी कि ऐसा देखकर स्वामी जी भड़क जाएंगे और गुस्से में कुछ ऐसी टिप्पणी करेंगे, जिससे उनके संयम को चुनौती दी जा सके। उन्होंने स्वामी जी से पूछा कि पुस्तकों को रखने का यह तरीका कैसा लगा आपको। स्वामी विवेकानंद ने उसे गंभीरता से देखा और धैर्य के साथ उत्तर दिया कि नींव वास्तव में अच्छी है। उस व्यक्ति को इस उत्तर की उम्मीद नहीं थी लेकिन विवेकानंद की इस संयत टिप्पणी ने उसे लज्जित कर दिया।

 

याद रखें, केवल धैर्य ही आपको अपनी पूरी मानसिक क्षमता का उपयोग करने में सक्षम बनाता है और जिसके कारण आप कठिन से कठिन चुनौतियों का सफलता पूर्वक सामना करने के योग्य बन जाते हैं। इसलिए धैर्य को बनाए रखने की प्रवृति का विकास करें। धैर्य रखने का सीधा मतलब अपने स्वभाव के शांत होने से है। जब आप शांत होकर स्थिरता के साथ चुनौतियों का सामना करते हैं और अपने को उत्तेजित नहीं होने देते तो आप इतना मजबूत हो जाते हैं कि किसी भी कठिनाई का समाना आप कर सकते हैं। 

 नकारात्मक विचारों से दूर रहें
 आपके अंदर पनपने वाले विचार आपके अंदर संचालित होने वाली ऊर्जा को प्रभावित करता है। जिस तरह के विचार अपने अंदर लाएंगे वैसा ही प्रभाव आपके व्यक्तित्व पर पड़ेगा। अगर आपके अंदर नकारात्मक विचार आते हैं, तो कार्यक्षमता प्रभावित होगी, आलस्य छाया रहेगा और फिर अपने मकसद को पूरा करने में अपनी पूरी क्षमता का उपयोग आप नहीं कर पाएंगे। इसलिए नकारात्मक प्रवृति वाले लोगों से दूर रहें और सकारात्मक सोच वाले लोगों के साथ अपनी बातें साझा करें ताकि आपकी ऊर्जा को सही दिशा मिल सके। 

समय का सदुपयोग करें 
समय बहुत कीमती होता है और जो चला गया उसे कभी वापस नहीं लाया जा सकता है, इसलिए इसके उपयोग में हमेशा सावधानी रखें। अगर आप अपने संसाधनों का उपयोग करके कोई काम दूसरे से करा सकते हैं, तो उसे खुद करके थोड़ा संसाधन बचाने की कोशिश न करें, क्योंकि उसी समय आप उससे बड़ा काम कर सकते हैं। ऐसे हीं छोटी-छोटी बातों का ध्यान रखें, ताकि समय हाथ से न फिसल जाए। 

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